भारत में बिजली का आविष्कार कब हुआ था?
भारत में बिजली का आविष्कार कब हुआ था?

भारत में बिजली का आविष्कार कब हुआ था : बिजली का आविष्कार अलेक्जेंडर लोडीजिन और विलियम ग्रीन ने किया था। लेकिन बिजली का आविष्कार किसी निश्चित व्यक्तियों ने नहीं बल्कि अनेक विद्वानों ने विभिन्न विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों ने साथ मिलकर किया था।

बिजली का संक्षिप्त इतिहास :

आज की दुनिया में ऐसे अनेक आविष्कार हुए हैं जिसने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है जिसमें बिजली सर्व प्रथम स्थान रखती है । बिजली के आविष्कार से पूरी दुनिया को एक नई दिशा प्रदान हुई है। बिजली संभवत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण खोज मानी जाती है । आज के जीवन में हम बगैर बिजली के अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कभी कर सकते हैं। बिजली हमें दिया हुआ विज्ञान का एक ऐसा वरदान माना जाता है हम जिससे तकरीबन सभी बड़े बड़े अविष्कार कहीं ना कहीं जुड़े हुए हैं।

ऐसा माना जाता है कि बिजली एक स्वाभाविक रूप से होती है और यह ऊर्जा का एक रूप माना जाता है। शायद इसलिए बिजली को खोजा गया था नाक की इसका आविष्कार किया गया था। बिजली की खोज का श्रेय कई बड़े-बड़े महान हस्तियों और प्रतिभाओं को दिया जाता है केवल एक को नहीं दिया जाता। बिजली की खोज किसी एक व्यक्ति ने नहीं की है बल्कि अनेक विद्वानों ने साथ मिलकर बिजली की खोज की है।

जैसा की जानकारियों से प्राप्त है की बिजली की खोज का कार्य तकरीबन 600 ईसा पूर्व में शुरू किया गया था जब प्राचीन यूनानी यों ने सीखा है कि एंबर( जीवाश्म वृक्ष) पर फर्क इसमें से जो राल बनती है उसके कारण वस्तुओं के बीच चुंबकत्व का निर्माण होता है जिसे आज हम स्थिर ऊर्जा नाम देते हैं। 1930 के दशक में शोधकर्ताओं ने प्राचीन बैटरी ओ की भी खोज की थी

जिसका निर्माण तांबे की चादरों के साथ बर्तनों से निर्मित थी जिसके कारण प्रागैतिहासिक रोमन साइटों पर बिजली का उत्पादन करने के उनके प्रयासों को चिन्हित किया गया था। जैसा कि प्राप्त जानकारियों से यह पता चलता है कि प्राचीन बगदादी में भी पुरातात्विक को के द्वारा इसी तरह की कलाकृतियों की भी खोज की गई थी। इन कलाकृतियों को बैटरी के प्रारंभिक स्वरूप के रूप में दर्शाया जाता है।

17 वीं शताब्दी में इलेक्ट्रोस्टेटिक जनरेटर का आविष्कार भी किया गया था और साथ ही में सकारात्मक( धन) और नकारात्मक (ऋण) प्रवाह ( current) की भी खोज हुई थी। और इन्हीं तो खोजो से पूरी दुनिया में इलेक्ट्रॉन युग की शुरुआत हुई थी। इलेक्ट्रॉन की खोज के कारण पूरी दुनिया को एक नई दिशा प्राप्त हुई थी। ई.स. 1600 में अंग्रेजी चिकित्सक विलियम गिलबर्ट ने लैटिन शब्द “इलेक्ट्रिकस ” का इस्तेमाल एक दूसरे के खिलाफ झगड़ने वाली दो वस्तुओं के बीच घर्षण पैदा करने के लिए पर्यायवाची शब्द के रूप में इसका प्रयोग किया गया था।

बाद में एक और अंग्रेजी विज्ञानिक थॉमस ब्राउन ने अंग्रेजी चिकित्सक विलियम गिलबर्ट के कार्य पर अपनी शोध और निष्कर्षों का वर्णन करने के लिए ‘बिजली’शब्द का इस्तेमाल किया था। 1752 में एक और वैज्ञानिक बेन फ्रेंकलिन ने निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रिक स्पार्क और बिजली एक ही वस्तु के दो नाम है।

उसके बाद यह शोध का पता लगाया गया कि रासायनिक प्रतिक्रिया में भी बिजली का उत्पादन करने में सक्षम है। साथ ही यह भी सिद्ध किया गया कि एक इटालियन भौतिक शास्त्रन अलेक्सांद्रो वोल्टा ने। उन्होंने बाद में इलेक्ट्रॉनिक बैटरी का भी निर्माण किया जो स्थिर इलेक्ट्रॉनिक रवा का निर्माण कर सकती थी। इलेक्ट्रिकल चार्ज का स्थिर प्रभाव बनाने का यह पहला प्रयास था जो सफल रहा। पॉजिटिव चार्ज और नेगेटिव चार्ज कनेक्टर को जोड़ दीया और उनके माध्यम से वोल्टेज चलाकर बिजली के पहले संचालन के प्रबंधन का क्रेडिट वोल्टा को मिलता है।

1831 में माइकल फैराडे ने एक चुंबक का प्रयोग किया था जो तांबे के घूम आए हुए तार के अंदर जाने मैं सक्षम था और तांबे के तार के माध्यम से प्रवाह के छोटे अनुपात के विद्युत प्रवाह का निर्माण भी हुआ। इसलिए उन्होंने व्यवहारिक तरीकों से विद्युत प्रवाह उत्पन्न करने के लिए एक प्राथमिक विद्युत जनरेटर को आधार बनाया था। उसके बाद 1878 ईस्वी में एक अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने फिलामेंट लाइट बल्ब का एक नया आविष्कार किया था।

बिजली की खोज में अलग-अलग युगों और विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित व्यक्तियों का योगदान है। बिजली का निर्माण अनेक लोगों ने साथ मिलकर किया था बिजली का आविष्कार एक तरफ से सफल माना जाता है। लेकिन बिजली उत्पादन के पीछे एक के बाद एक घटना की खोज होती रही जिससे बिजली उत्पादन को क्रांतिकारी बना दिया गया तथा जिसमें बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर, जनरेटर इत्यादि भी शामिल किए गए हैं।

बिजली उत्पादन के स्रोत एवं विकास :

तार और टेलीफोन पर बिजली द्वारा संवाद भेजने में नोट्स और बैल नामक वैज्ञानिकों ने सफलता प्राप्त की। वर्तमान में तो बिजली घरों को रोशन कर रही है, कारखानों को चला रही है, ट्रेनों को गति दे रही है, विद्युत पंपों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचा रही है। जीवन पर कोई भी क्षेत्र आज विद्युत के बिना अधूरा सा लगता है।

विद्युत संयंत्रों में उत्पन्न विद्युत धारा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में ट्रांसफार्मर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पावर हाउस में उत्पन्न विद्युत धारा की प्रबलता अधिक होती है। इस धारा को इसी रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंचाया जा सकता है क्योंकि धारा की प्रबलता अधिक होने से उत्पन्न ऊष्मा का मान अधिक होगा जिसके कारण विद्युत धारा का ऊष्मा में अपव्यय होने लगेगा।

गैर परंपरागत ऊर्जा के रूप में जलविद्युत एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित होता है। जल विद्युत संयंत्र में जल की गति से प्राप्त ऊर्जा को टरबाइन द्वारा विद्युत ऊर्जा में बदल दिया जाता है। इस शोध से ना केवल सस्ती बिजली प्राप्त होती है बल्कि इस ऊर्जा स्रोत का नवीनीकरण भी किया जा सकता है। परंपरागत तौर से विद्युत का उत्पादन ताप विद्युत संयंत्रों के माध्यम से किया जाता है। कोयला तापीय ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण साधन माना जाता है परंतु इसकी सीमित उपलब्धता की वजह से एवं इसके नवीनीकृत साधन होने की वजह से ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों की ओर वैज्ञानिकों की दृष्टि गई। आगे के युग में कभी ऐसी समस्याएं उत्पन्न ना हो सके इसलिए वैज्ञानिकों ने बिजली का आविष्कार किया।

Conclusion

इस पोस्ट में आपको यह पता चल ही गया होगा कि भारत में सबसे पहले बिजली की खोज कब और किसने की थी। बिजली आजकल हमारी सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। बिजली के बिना आजकल हमारा कोई काम ही नहीं हो पाता। हमारा जीवन बिजली के बिना अधूरा सा है। बिजली की खोज वैज्ञानिकों द्वारा की गई सबसे उपयोगी एवं महत्वपूर्ण खोज सिद्ध हुआ है।

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