सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?
सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?

सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है? पूरे ब्रह्मांड में सौर परिवार में कुछ-कुछ ग्रह के आकार इतने विशाल है कि पृथ्वी जैसे हजारों ग्रह उनमें बहुत ही आसानी से समा सकते हैं। इन सभी विशाल ग्रहों का निर्माण सभी ग्रहों से विपरीत मुख्य रूप से वर्ग एवं गैस से हुआ है। फिर भी कई सारे लोगों के मन में यह सवाल हमेशा उत्पन्न होता है कि इन सभी बड़े बड़े ग्रहों में से सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है? तो आज हम इसी बारे में जानेंगे कि इस पूरे सौर परिवार में सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है एवं उसके बारे में और भी कई तरह की जानकारी हासिल करेंगे।

सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?

बृहस्पति ग्रह इस पूरे सौर परिवार में सबसे बड़ा ग्रह है। जिसका व्यास 142984 किलोमीटर , आयतन 1.4313×1015 Km3 तथा द्रव्यमान 1.8982×1027 किलोग्राम होता है। बृहस्पति ग्रह एक ही ऐसा ग्रह है जो संयुक्त रूप से अन्य सभी ग्रहों की तुलना में सबसे ज्यादा बड़ा होता है। यदि इस ग्रह का आकार वर्तमान में उसके आकार की तुलना में 80 गुना और अधिक बड़ा होता तो यह एक तारा होता।

वर्तमान में इस ग्रह का जितना आइटम है उसमें 1300 से भी अधिक पृथ्वी जैसे कई सारे ग्रह इस में समा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि बृहस्पति पृथ्वी की तुलना में एक बास्केटबॉल जितना बड़ा होता है एवं पृथ्वी बृहस्पति की तुलना में एक अंगूर के आकार का होता है।

सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?
सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?

बृहस्पति सौरमंडल का पांचवा ग्रह है जो पृथ्वी से काफी दूर स्थित है परंतु इसकी दूरी इस की परिक्रमा के साथ बढ़ती घटती रहती हैं। तो आइये इस विशाल ग्रह के बारे में और भी कई तरह की जानकारी प्राप्त करते हैं।

बृहस्पति एक ऐसा ग्रह है जहां पर यदि पृथ्वी पर हमारा वजन 50 किलोग्राम है और अगर हम बृहस्पति ग्रह पर जाते हैं तो वहां हमारा वजन 132 किलोग्राम हो जाएगा। क्या आप जानते हैं ऐसा किस लिए होता है तो चलिए हम आपको यह बताते हैं। बृहस्पति ग्रह सौरमंडल का सबसे विशाल ग्रह में से एक है सूर्य की सौरमंडल में परिक्रमा करने वाला या पांचवा ग्रह है। बृहस्पति ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है इसी वजह से वहां पर हमारा वजन और अधिक बढ़ जाता है। बृहस्पति ग्रह का वजन पृथ्वी से 318 गुना अधिक होता है। बृहस्पति ग्रह का व्यास पृथ्वी की तुलना में 11 गुना अधिक होता है। आप सभी को यह जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि सौरमंडल में स्थित सभी ग्रहों के भजन का 70% भाग केवल बृहस्पति ग्रह का है। सूर्य सौरमंडल का एक तारा होता है जिसके चारों और सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।

यदि हम यह मान ले की सभी ग्रहों को मिलाकर पूरे सौरमंडल में इन सभी ग्रहों का वजन 100 किलोग्राम है तो केवल बृहस्पति ग्रह का वजन 70 किलोग्राम हो जाता है। जिस तरह पृथ्वी एक ग्रह है एवं उसका एक उपग्रह चंद्रमा होता है ठीक उसी प्रकार बृहस्पति के कूल 64 उपग्रह होते हैं। किसी भी ग्रह के उपग्रह को चंद्रमा कहां जाता है। बृहस्पति ग्रह के 50 से भी अधिक उपग्रहों का व्यास 10 किलोमीटर से भी अधिक होता है। बृहस्पति के चार बड़े उपग्रह का नाम आयो, गेनिमिड, यूरोपा एवं कैलिस्टो है। इन उपग्रहों में से किसी किसी उपग्रह में महासागर के होने का भी अनुमान लगाया गया है जिस कारण वैज्ञानिकों द्वारा यह आशा की जा रही है कि यहां जीवन होने की संभावना है।

आमतौर पर बृहस्पति ग्रह को हम अंग्रेजी भाषा में जुपिटर कह कर पुकारते हैं। क्या आप सभी यह जानते हैं कि इस बृहस्पति ग्रह का नाम जूपिटर क्यों और कैसे पड़ा यदि आपको इस बारे में नहीं पता तो चलिए हम इसके बारे में जानते हैं। जुपिटर नाम आमतौर पर रोमन सभ्यता के किसी देवता का नाम है। बृहस्पति ग्रह एक विशाल ग्रह है जो गैसों का गोला है यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन एवं हीलियम से मिलकर बना होता है। खगोल शास्त्रियों का यह मानना है कि इस ग्रह में 24% हिलियम 71% हाइड्रोजन एवं 5% अन्य गैस एवं तत्व मौजूद है। अन्य 5% तत्व एवं गैस बृहस्पति के केंद्र में स्थित होते हैं जिसे आमतौर पर धातु हाइड्रोजन कहते हैं। बृहस्पति ग्रह का इस धातु गोले के वजह से ही बृहस्पति का चुंबकीय शक्ति या फिर गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत अधिक होता है।

वैज्ञानिकों का यह मानना है कि पृथ्वी की तुलना में बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से 14 गुना अधिक होता है। अपने इस चुंबकीय शक्ति के कारण बृहस्पति ग्रह सौरमंडल की कई प्रकार से सहायता करता है। अब आप इस सोच में पड़ गए होंगे की यह ग्रह अपने चुंबकीय शक्ति के कारण सौरमंडल की सहायता कैसे करता है। तो चलिए हम यह जानते हैं सही वैज्ञानिकों का मानना है कि सौरमंडल को धूमकेतु से काफी सारा नुकसान हो सकता है परंतु बृहस्पति ग्रह अपने गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण शुद्र ग्रहों को एवं धूमकेतु हो नियंत्रित करके रखता है जिससे वह सौर मंडल को नुकसान होने से बचाता है।

क्या आपको यह बात पता है कि बृहस्पति पर एक विशाल लाल धब्बा क्यों है। इस धब्बे को ग्रेट रेड स्पॉट कहते हैं। यह एक प्रकार का तूफान होता है जिसे वैज्ञानिकों ने लगभग 350 वर्ष पहले इस बारे में पता लगाया था। बृहस्पति ग्रह पर भूरे एवं सफेद रंग के कई तरह के अनेकों धब्बे हैं परंतु या लाल धब्बा काफी बड़ा होता है। यह धब्बा इतना बड़ा होता है कि इसमें कम से कम तीन या चार पृथ्वी आसानी से समा सकती है। यह लाल धब्बा अंडाकार होता है जिसकी चौड़ाई 12 से 14 हजार किलोमीटर तथा लंबाई 25 से 40 हजार किलोमीटर तक होती हैं।

इस तरह बृहस्पति ग्रह सौरमंडल का पांचवा एवं सबसे विशाल ग्रह है जो सभी ग्रह की भांति सूर्य की परिक्रमा लगाता है। बृहस्पति ग्रह में अधिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति होने के कारण यह धूमकेतु उसे सौरमंडल की रक्षा भी करता है। तो अब आप बृहस्पति ग्रह के बारे में जान ही चुके होंगे। अब आपको यह पता चल गया होगा कि सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है एवं यह कैसा होता है। इसकी लंबाई चौड़ाई व्यास आयतन इन सभी के बारे में आपको अच्छी खासी जानकारी प्राप्त हो गई होगी।

निष्कर्ष –

मैं आशा करता हूं कि आज का हमारा यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा आपको सौरमंडल एवं उसके ग्रहों से संबंधित सभी तरह की जानकारी उपलब्ध हो गई होगी। यदि आपको आज का हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो इसे लाइक करें शेयर करें ताकि और भी कई सारे लोग जैसे आपके दोस्त रिश्तेदार इन सभी को इसके बारे में जानकारी हो सके। यदि सौर मंडल एवं उनके ग्रहों से संबंधित आपके मन में किसी भी तरह की कोई भी सवाल हो तो उसे नीचे हमारे कमेंट बॉक्स पर अवश्य लिखें हम आपके सवालों के जवाब देने का पूरा पूरा प्रयास करेंगे। धन्यवाद……

यह भी पढ़े

 

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here