विद्युत धारा की खोज किसने की थी ?
विद्युत धारा की खोज किसने की थी ?

विद्युत धारा की खोज किसने की थी? : विद्युत धारा की खोज एलेग्जेंडर लोडिजीन और विलियम ग्रीन ने किया था। उन्होंने 1831 ईसवी में चुंबक से बिजली की धारा उत्पन्न करने की कोशिश की थी जिसमें वह सफल रहे और जिसके कारण उन्नति का एक नए युग का जन्म हुआ। फैराडे कि इस खोज को अनेक वैज्ञानिकों ने जी तोड़कर मानव जाति के लिए अत्यंत उपयोगी बनाया था उन्होंने बिजली से चलने वाले अनेक यंत्र की खोज भी की थी। जो मानव जाति के लिए अत्यंत उपयोग सील रही। इस विद्युत धारा की खोज में अनेक विद्वानों और वैज्ञानिकों ने अपना पूरा सहयोग दिया। जिसके कारण वे सफल रहे।

विद्युत धारा की खोज किसने की थी?

विद्युत आवेशों के बहाव एवं मौजूदगी के कारण उससे जुड़े भौतिक घटनाओं के समुच्चय को विद्युत कहते है। इसे ना तो छुआ जा सकता है और ना ही इसे देखा जा सकता है परंतु इसके प्रभाव के माध्यम के द्वारा इसे केवल महसूस किया जा सकता है। विद्युत से बहुत सारी जानी-मानी दुर्घटनाएं जुड़ी रहती है

जैसा कि तडित, स्थैतिक विद्युत, विद्युत चुंबकीय प्रेरण तथा विद्युत धारा विद्युत धारा। इसके अतिरिक्त ही विद्युत के द्वारा विद्युत चुंबकीय तरंगों जैसे रेडियो तरंग की उत्पत्ति और प्राप्ति संभव हो सकी है। विद्युत के साथ चुंबकत्व भी जुड़ी हुई घटना है। विद्युत आवेश विद्युत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है और विद्युत क्षेत्र में रखे विद्युत अवश्य पर बल लगाती है।

जब विद्युत और चुंबकत्व का एक साथ अध्ययन किया जाता है तो इसे विद्युत चुंबकत्व कहते हैं। विद्युत को अनेक प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है किंतु सरल शब्दों में यह कहा जाए कि विद्युत आवेश की उपस्थिति तथा बहाव के परिणाम स्वरूप उत्पन्न उस सामान्य अवस्था को विद्युत कहते हैं जिनमें अनेक कार्यों को संपन्न करने की क्षमता होती है। विद्युत चल अथवा आंचल इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन से संबंधित भौतिक घटना है। किसी चालक में विद्युत आवेशों के बहाव से उत्पन्न ऊर्जा को विद्युत कहते हैं।

विद्युत आवेश के प्रवाह अर्थात विद्युत आवेशित कणों के किसी निश्चित दिशा में गति करने को विद्युत धारा कहते हैं।

विद्युत धारा की खोज किसने की थी ?
विद्युत धारा की खोज किसने की थी ?

विद्युत धारा का संक्षिप्त इतिहास :

यह अनुमान लगाया जाता है कि लगभग ईसा से 600 वर्ष पूर्व यूनान निवासी थेलिज इस बात से अच्छी तरह परिचित है कि कुछ वस्तुओं को आपस में रगड़ने के पश्चात उसमें से हल्की सी चिंगारी उत्पन्न होती है जो वस्तुओं को आकर्षित करती है। इसका उल्लेख Theophrastus ने 321 ईसा पूर्व में तथा Pliny नेशन 70 में किया था। बताया जाता है कि इस आकर्षण शक्ति का अध्ययन 16वीं शताब्दी में विलियम गिलबर्ट के द्वारा (1540 – 1603 ईसवी के बीच) किया गया था तथा उन्होंने इससे इलेक्ट्रिक नाम दिया। आधुनिक शब्द इलेक्ट्रॉन का उपयोग यूनानी भाषा में अंबर के लिए किया जाता है

इलेक्ट्रिसिटी शब्द का उपयोग वॉल्टन शाल्र्टन ( Walter Charlton) ने किया था। इसी समय रॉबर्ट बॉयल ने 1627 से 1691 ईस्वी में पता लगाने की कोशिश की कि आवेशित वस्तु ए हल्की वस्तुओं को 0 में भी आकर्षित कर सकती है अर्थात विद्युत के प्रभाव के लिए हवा का माध्यम होना अति आवश्यक नहीं है । सन 1729 ईस्वी में स्टीफन ग्रे ने अपने प्रयोगों के आधार पर यह कहा है कि आकर्षण शक्ति किसी वस्तु के एक भाग से दूसरे भाग को संचारित की जा सकती है। ऐसी वस्तुओं को देसाग्युलियर्स ( Desaguliers) ने चालक कहा है ।

सभी प्रकार की धातुएं इस श्रेणी में आती हैं। वह वस्तुएं जिनमें इस शक्ति को संचारित नहीं किया जा सकता है उसे विद्युत रोधी कहां जाता है। इस श्रेणी में अंबर, मॉम, सुखी हवा, सूखा कांच, रबड़, लाख इत्यादि आते हैं।

वस्तुओं की रगड़ के कारण विद्युत दो प्रकार के उत्पन्न होती है- धनात्मक एवं ऋणात्मक। पहले इनके क्रमशः काचाभ (Vitreous) तथा रेजिनी (Resionous) नाम प्रचलित थे। सन 1737 ईस्वी में दूसरे नामक एक वैज्ञानिक ने बताया कि सजातीय आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विजातीय एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। लगभग इसी समय में विद्युत को पर्याप्त मात्रा में प्राप्त करने के प्रयत्न भी किए गए थे

तथा विभिन्न प्रकार के विद्युत यंत्रों का आविष्कार भी किया गया था। विलिय वाटसन का विचार था कि एक प्रकार का प्रत्यास्थ तरल ( Elastic Fluid) होती है जब प्रत्येक वस्तु में विद्यमान होती है। आदेश विभिन्न वस्तुओं में यह साधारण मात्रा में होती है अतः का निरीक्षण नहीं किया जा सकता क्योंकि वाटसन के तरंग सिद्धांत के अनुसार विद्युत एक वस्तु से दूसरे विश्व में गमन करती है।

अमेरिकी वैज्ञानिक तथा राजनीतिज्ञ बेंजामिन फ्रैंकलीन ने सन 1706 से 1790 में यह सिद्धांत का समर्थक किया और इसका विस्तार पूर्वक इसकी जानकारी भी दी। फ्रेंकलिन ने यह कहा कि विद्युत ना तो उत्पन्न की जा सकती है और ना ही नष्ट किया जा सकता है। फ्रेंकलिन ने डेंजर का अध्ययन कर उसकी क्रिया को समझाने का पूरा प्रयास किया था परंतु यह प्रयोग फ्रैंकलीन का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रसिद्ध प्रयोग सिद्ध हुआ था।

उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि मेघा से मेघ गर्जन के समय साधारण विद्युत तथा विद्युत धारा के गुण दोनों समान होते हैं साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि विद्युत के कल एक दूसरे पर बल डालते हैं। फ्रैंकलिन के पश्चात एपीनुस ने सन 1724 – 1802 इसवी में अपना यह विचार प्रस्तुत किया और यह आभास भी दिलाया कि दो वस्तुओं का बल उनके बीच की दूरी बढ़ाने पर घट जाता है। इसके बाद कुलाॅम ( Coulomb ) ने भी सन 1736 – 1806 ईसवी खोज की की दो आवेशों के बीच का बल, उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युतक्रमानुपाती तथा आवेशों के गुणनफल के समानुपाती होता है। विद्युत का यह मूल नियम अब भी कुलम का नियम कहा जाता है।

इसी तरह से अनेक विद्वानों ने और वैज्ञानिकों ने अपने अपने शब्दों में विद्युत धारा को परिभाषित किया है। देखा जाता है कि विद्युत धारा की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती है अनेक विद्वानों ने इसे अपने अपने रूप में इसे प्रस्तुत किया है। बाद के वैज्ञानिकों में से प्रमुख वैज्ञानिक जे एस टाउनसेंड तथा उनके प्रमुख साथी आते हैं। सन 1902 में रिचर्ड्सन ने ” तापायनिक ” विषय की नींव डाली। तापायनिक धारा के सिद्धांत पर रेडियो तथा इलेक्ट्रॉनिकी के अन्य वाल्वो की रचना भी हुई थी। बीसवीं शताब्दी में एक के बाद एक महत्वपूर्ण खोज हुआ था

जिसके परिणाम स्वरूप आज हाइड्रोजन बम, संगलन ऊर्जा स्पुतनिक तथा अन्य उपग्रह इत्यादि का सूत्रपात हुआ। इन सब चीजों के अविष्कार के पीछे किसी ना किसी रूप में विद्युत के सिद्धांत का उपयोग हुआ था।

विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव :

बताया जाता है कि वैज्ञानिक ओरस्टेड ने अपने प्रयोगों के द्वारा यह ज्ञात किया है कि जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके चारों और चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव को वैज्ञानिक ओरस्टेड के अलावा अनेक वैज्ञानिकों ने जैसे फैराडे एपियर और बोर आदि वैज्ञानिकों ने इसकी खोज में अपनी सहायता प्रदान की।

Conclusuon

अब आपको इस बात का पता चल गया है कि विद्युत धारा क्या है एवं इसकी खोज कब और किसने की थी? इस विद्युत धारा की खोज ने पूरे विश्व में एक नई उन्नति को जन्म दिया। विद्युत धारा की खोज से कई सारे उद्योग आदि को बढ़ावा मिला। इसी वजह से आज ही आ काफी उपयोगी चीज बन गया है। आज के समय में विद्युत धारा के बिना किसी मनुष्य का काम ही नहीं चल पाता है।

मैं आशा करत हूं आज का यह पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा। यदि इस पोस्ट से संबंधित जानकारी आपको अच्छी लगी है तो इसे लाइक एवं शेयर करें ताकि और भी लोगों तक यह जानकारी पहुंच सके। विद्युत धारा से संबंधित यदि कोई सवाल आपके मन में हो तो उसे नीचे हमारे कमेंट बॉक्स पर लिखें हम आपके सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद…..

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