mahabharat ki rachna kisne ki –
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mahabharat ki rachna kisne ki : इस लेख में आज हम इस बात की चर्चा करेंगे की महाभारत की रचना किसने की और कब की? हम सभी आज के समय में महाभारत के बारे में तो जानते ही हैं एवं लगभग सभी लोगों ने टीवी पर महाभारत अवश्य देखी होगी और यह भी आप सभी को पता होगा की महाभारत इतना प्रसिद्ध क्यों है क्योंकि इसमें भगवान श्री कृष्ण द्वारा
दिया गया गीता का ज्ञान होता है। गीता को इस संसार का सबसे बड़ा ज्ञान कहा जाता है एवं यह भी कहा जाता है कि गीता में संसार के हर एक इंसान की समस्या का समाधान होता है इसी वजह से सभी व्यक्ति को गीता अवश्य सुननी चाहिए।

अधिकतर लोगों ने महाभारत के बारे में सुना तो है परंतु उन्हें यह ज्ञात नहीं है कि महाभारत की रचना किसने की है। महाभारत की रचना किसने की आज हम अपने लेख के द्वारा आपको यह बताएंगे एवं महाभारत से संबंधित और भी कई तरह की जानकारी भी देंगे।

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महर्षि वेदव्यास द्वारा महाभारत की रचना की गई थी।

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महाभारत क्या है ?–

महाभारत एक प्रकार का प्राचीन भारतीय महाकाव्य है जिसमें एक परिवार के दो शाखाओं कौरवों एवं पांडवों के चारों ओर घूमती रहती है। इस महाकाव्य में गौरव एवं पांडव दोनों कुरुक्षेत्र युद्ध में हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए युद्ध करते हैं। इस आख्यान में अंता विषय मृत या जीवित लोगों एवं दार्शनिक प्रवचनों के बारे में कई सारी छोटी-छोटी कहानियां बताई गई है।

कृष्ण द्वैपायन व्यास जो स्वयं महाकाव्य में एक पात्र रह चुके थे उन्होंने इसकी रचना की जैसा की परंपरा के अनुसार कृष्ण द्वैपायन व्यास जी मैं छंदों को निर्धारित किया एवं भगवान गणेश ने उन्हें लिखा। एक लाख से ऊपर अब तक की यह सबसे लंबी महाकाव्य कविता है जिसे आमतौर पर 4 वी शताब्दी ईसा पूर्व या उससे पहले इसकी रचना की गई थी।

इससे महाकाव्य के घटनाओं को भारतीय उपमहाद्वीप एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में देखी जाती है या खेली जाती है। यह पहली बार महर्षि व्यास के एक छात्र द्वारा कहानी के प्रमुख पात्रों में से 1 पात्र के द्वारा सांप के बलिदान पर सुनाई गई थी। इस महाकाव्य के भीतर महाभारत प्राचीन भारतीय अवम् भगवत गीता वास्तव में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक जानी जाती है।

महाभारत का लिखना (writing of mahabharata)-

रामायण के साथ-साथ महाभारत भी एक महान हिंदू महाकाव्य में से एक मानी जाती हैं। यह दुनिया की सबसे लंबी कहानी एवं सभ्यता के इतिहास में सबसे क्रूर युद्ध में से एक भव्य कहानी बताई गई है। यहां युद्ध चचेरे भाइयों कौरवों एवं पांडवों के बीच हुई थी। महाभारत को महान गुरु महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित किया गया था।

एक शक्तिशाली व्यक्ति –

महर्षि वेदव्यास जी 100 कौरवों एवं पांच पांडवों के दादा थे। कौरवों के पिता धृतराष्ट्र एवं पांडवों के पिता पांडू कुरु वंश में विचित्रवीर्य के पुत्र थे। ऐसी धारणाए हुआ करती थी की वेदव्यास जी का जीवन बहुत लंबा था एवं उन्होंने अपने बच्चों एवं नाती पोतों का भी पालन किया था।

महाकाव्य की प्रेरणा –

एक बार जब महर्षि वेदव्यास जी हिमालय में ध्यान कर रहे थे तो उस वक्त उन्हें दुनिया के निर्माता भगवान ब्रह्मा के दर्शन हुए थे। उसी वक्त भगवान ब्रह्मा ने महर्षि वेदव्यास जी को महाभारत लिखने की सलाह दी थी। महर्षि वेदव्यास जी वास्तव में इस महाकाव्य को लिखने में सबसे अच्छे एवं सक्षम व्यक्ति थे।

दुविधा –

महाभारत की कहानियां की जटिलता को जानते हुए वेदव्यास को यह ज्ञात था कि यह कठिन कार्य है क्योंकि महाभारत में कई सारी घटनाओं एवं कई सारे चरित्र थे जिन्हें वेदव्यास जानते थे एवं उन्हें महाभारत लिखने में किसी की मदद की आवश्यकता थी। उसी वक्त भगवान ब्रह्मा ने उन्हें भगवान गणेश की मदद लेने की सलाह दी थी।

गणेश भगवान की भूमिका –

जब क्या पता चला की वेदव्यास ने इस महाकाव्य को लिखने के लिए भगवान गणेश को सुना है तो सभी बहुत अधिक प्रसन्न हो गए थे। जैसे ही महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश की आराधना की जो उनके सामने प्रकट हो गए। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश बहुत अधिक शरारती भगवानों में से एक माने जाते हैं। भगवान गणेश वेदव्यास को एक शानदार विचार के साथ बहुत ही कम समय में इस महाकाव्य को लिखने के लिए आए थे।

उनकी हालत –

महर्षि वेदव्यास ने इस महाकाव्य को जल्द से जल्द बनाने के लिए भगवान श्री गणेश के सामने एक शर्त रखी एवं कहां की वे इस महाकाव्य को सुनाना शुरू करेंगे एवं भगवान गणेश को या महाकाव्य जल्दी जल्दी लिखना होगा। यह सुनकर भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास के सामने भी एक शर्त रखी की यदि वेदव्यास इस महाकाव्य को सुनाते सुनाते बीच में एक बार भी रुकेंगे तो गणेश जी इस साहित्य को लिखना बंद कर देंगे।

गणेशजी का ज्ञान –

भगवान गणेश बहुत ही अधिक तीव्र गति से लिखते थे जो अस्पष्ट था। इसका अर्थ यह था कि वह दोनों हाथों से बहुत ही आसानी से लिख सकते थे। महर्षि वेदव्यास जी इस असमंजस में पड़ गए कि क्या हुआ भगवान गणेश की लिखने की गति से मेल खाकर चल पाएंगे। उनका मुकाबला करने के लिए महर्षि वेदव्यास जी एक शानदार विचार लेकर आए जो उन्होंने गणेश जी को सुनाया।

गणेशजी ने लिखना शुरू किया –

महर्षि वेदव्यास जी ने यह कहा कि उन्हें भगवान गणेश की स्थिति से कोई समस्या नहीं है परंतु उन्होंने भगवान गणेश के सामने एक शर्त रखी कि वह एक ही बार में पूरे महाकाव्य का पाठ करेंगे। महर्षि वेद व्याश जी की भी अपनी एक शर्त थी कि जब भगवान गणेश प्रत्येक पंक्ति का अर्थ समझेंगे और वे लिखना शुरू करेंगे उस समय वेदव्यास जी को कुछ समय मिलेगा।

कठिन काव्य –

जल्द ही भगवान गणेश ने इस महाकाव्य को लिखना प्रारंभ कर दिया। जब भी महर्षि वेदव्यास को थकान महसूस होने लगती थी वह भगवान गणेश को उसी तरह का एक बहुत ही कठिन कविता सुनाते जो बाद में उन्हें समझने में समय लगता था। इससे वेदव्यास को कुछ समय मिलता था जिससे वह अपने अंतरिम रूप से खुद को तरोताजा कर लेते थे एवं आराम करते थे और उसी वक्त वे और भी अधिक कठिन छंदो के बारे में सोच लेते थे।

टूटा हुआ दांत –

जब भगवान गणेश एवं महर्षि वेदव्यास जी दोनों सामूहिक रूप से इस कहानी को जोड़ रहे थे उस वक्त एक और जटिलताएं उत्पन्न हो गई। भगवान गणेश ने इस प्राचीन ग्रंथ को लिखने के लिए जिस मोर पंख का उपयोग कर रहे थे वह टूट गई क्योंकि वह भगवान गणेश के लिखने की गति से मेल नहीं खा रही थी। परंतु उसके बाद भी भगवान गणेश ने लिखना प्रारंभ ही रखा उन्होंने अपने एक दांत को तोड़ दिया एवं उसे लिखना प्रारंभ कर दिया।

एकदन्त –

इसी वजह से भगवान गणेश को अधिकांश चित्रों में एक ही दांत के साथ देखा जाता है जिससे दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू महाकाव्य लिखा गया था। हालांकि यह इतनी लंबी कहानी है कि इसे भगवान गणेश के लेखन एवं महर्षि वेदव्यास के कथन के संयुक्त प्रयासों के कारण इसे केवल 3 वर्षों में ही पूरा लिख दिया गया था।

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निष्कर्ष –

महाभारत एक बहुत ही महत्वपूर्ण महाकाव्य है क्योंकि इसमें भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिया गया गीता का ज्ञान मौजूद है। जो कि जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण धारणा है। गीता में जीवन से जुड़ी सभी तरह की परेशानियों का हल मिल जाता है फिर चाहे वह परेशानी कितनी बड़ी क्यों ना हो गीता में सभी तरह के समस्याओं का समाधान मौजूद होता है। इसी कारण गीता की वजह से महाभारत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

यदि आपको आज की हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो इसे लाइक करें एवं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे शेयर करें। मुझे उम्मीद है कि आपको अब यह पता चल गया होगा कि महाभारत क्या है एवं इसकी रचना किसने की थी? यदि महाभारत से संबंधित किसी भी प्रश्न को आप हम से पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स पर लिखे हम आपके सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद…..

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