oxygen ki khoj Kisne Ki
oxygen ki khoj Kisne Ki

 oxygen ki khoj Kisne Ki :  ऑक्सीजन की खोज सबसे पहले 1772 ईस्वी में स्वीडन के कालसी ले नामक वैज्ञानिक ने की थी।

इसके बाद 1774 ईस्वी में ऑक्सीजन की खोज हुई प्राप्ति हुई अथवा इसके प्रारंभिक अध्ययन में जो सिर्फ प्रलय का योगदान भी रहा।
ऑक्सीजन की खोज सबसे पहले 1772 में स्वीडन के कार्ल शीले नामक वैज्ञानिक ने की थी। इन्होंने अपनी खोज को प्रकाशित भी कर दिया।

क्या आप जानते हैं की सन 1775 ईस्वी में एंटोनी लेवोइजियर ने सर्वप्रथम इस गैस के गुणों का वर्णन किया और इसका नामकरण किया। क्या आप जानते हैं किस गैस का नाम क्या रखा गया ? बाद में इस गैस का नामकरण ऑक्सीजन रखा गया। इस गैस के नामकरण के बाद इस गैस को एक तत्व की संज्ञा दी गई।

इसका नाम ऑक्सीजन रखा गया, जिसका अर्थ होता है- “अमला उत्पादक”। मुख्य रूप से इस खोज का पूरा श्रेय शीले को ही दिया जाना चाहिए। क्यों किसी लेने पोटैशियम नाइट्रेट को गर्म करके ऑक्सीजन गैस तैयार किया लेकिन उनका यह कार्य कुछ समय बाद में उजागर हुआ। सिले का आविष्कार सन 1777 ईस्वी में प्रकाशित हुआ और इसकी जानकारी सभी को हुई

oxygen ki khoj Kisne Ki
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ऑक्सीजन की खोज का श्रेय किसी भी एक वैज्ञानिक को नहीं दिया जा सकता है क्योंकि इसकी खोज किसी और ने की है, प्रयोगशाला में इसे तैयार किसी दूसरे ने किया है और इसके रासायनिक गुणों का अध्ययन किसी तीसरे वैज्ञानिक ने किया था और अंत में ऑक्सीजन का नामकरण ऑक्सीजन किसी और ने दिया था। इसीलिए सही तरीके से यह नहीं कहा जा सकता है कि ऑक्सीजन की खोज किसने की है। हां लेकिन ऑक्सीजन के आविष्कार का ख्याल सबसे पहले कार्ल शीले को आया था इसलिए उन्हें ऑक्सीजन का जनक भी कहते हैं। ऑक्सीजन एक रासायनिक तत्व है।

ऑक्सीजन के बारे में तो हम सभी जानते हैं क्योंकि बिना ऑक्सीजन के कोई भी व्यक्ति सांस नहीं ले सकता है । ऑक्सीजन है तो मनुष्य और जीव जंतु है, ऑक्सीजन सभी प्राणियों के लिए बहुत ही आवश्यक होता है क्योंकि बिना ऑक्सीजन के कोई भी मनुष्य या जीव-जंतु जीवित नहीं रह सकते हैं उन्हें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। ऑक्सीजन रंगहीन, स्वादहीन तथा गंध रहित गैस है। क्या आपको पता है कि ऑक्सीजन का रासायनिक सूत्र भी होता है? चलिए आज हम यहां पर आपको ऑक्सीजन के बारे में सारी जानकारियां देते हैं।

उपस्थिति:

पृथ्वी के पदार्थों में ऑक्सीजन रहता है जिस प्रकार पानी। अन्य तत्वों की अपेक्षा ऑक्सीजन की मात्रा पानी में सबसे अधिक होती है। वायुमंडल में ऑक्सीजन मुख्य रूप से स्वतंत्र मिलता है आयतन के अनुसार उसका लगभग पांचवा भाग है। योगिक रूप में पानी, खनिज तथा चट्टानों का महत्वपूर्ण अंश होता है। वनस्पति तथा प्राणियों मे प्राय ऑक्सीजन एक तरह का सब शारीरिक पदार्थ का आवश्यक तत्व ही है। इसकी मात्रा वायुमंडल में 20. 95% तक लगभग होती है। ऑक्सीजन पृथ्वी पर सर्वाधिक मात्रा लगभग 46.6% में पाया जाने वाला तत्व माना जाता है।

रासायनिक जानकारी:

ऑक्सीजन का रासायनिक सूत्र O होता है और ऑक्सीजन को हिंदी में प्राणवायु या जारत भी कहा जाता है। क्या आप जानते हैं की ऑक्सीजन को प्राणवायु किस लिए कहते हैं। ऑक्सीजन को हिंदी में प्राण वायु इसलिए कहते हैं क्योंकि यह सभी प्राणियों के जीवित रहने का एकमात्र साधन है। बिना ऑक्सीजन के कोई जीव जंतु या मनुष्य प्राणी सांस नहीं ले सकते हैं। सभी सभी जीव जंतुओं और प्राणियों को जीवित रहने के लिए सांस लेने की आवश्यकता होती है। वायु में करीब 20. 29 प्रतिशत मात्रा ऑक्सीजन की ही होती है।

ऑक्सीजन हमें कई प्रकार से प्राप्त हो सकते हैं। पृथ्वी के अनेक पदार्थों में ऑक्सीजन विद्यमान रहता है जैसे पानी। वास्तव में ऑक्सीजन की मात्रा अन्य तत्वों की तुलना में सबसे अधिक होती है। ऑक्सीजन हमें पेड़ पौधों से भी प्राप्त होता है। जैसा कि आपको यह पता होगा कि पेड़ पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं और उसी ऑक्सीजन को हम ग्रहण करते हैं जिसके कारण आज हम जीवित हैं। ऑक्सीजन हमें कई तरह से प्राप्त हो सकते हैं जैसा कि ऊपर की लाइनों से स्पष्ट है।

निर्माण:

जैसा कि कई प्रकार के ऑक्साइडों जैसे पारा चांदी आदि अथवा कार्बन डाई ऑक्साइड लेड मैग्नीज बेरियम के तथा ऑक्सीजन वाले बहुत से लक्षणों जैसे पोटैशियम नाइट्रेट क्लोरेट परमैंगनेट तथा डाई क्रोमेट को अच्छी तरह से गर्म करने से हमें ऑक्सीजन प्राप्त हो सकता है। ऑक्सीजन का घनत्व 1.4290 ग्राम प्रति लीटर तक लगभग होती है एवं यह गैस वायु की अपेक्षा 1. 10527 गुना अधिक भारी होती है। ऑक्सीजन पानी में भी थोड़ा घुलनशील होता है ।

ऑक्सीजन को प्राणदेय वायु भी कहते हैं और यह एक ज्ञात विषय है जो वेदों में वर्णित है वेदों में इसका सूक्ष्म वर्णन भी दिया गया है। वेद की रचनाओं का पूजा पाठ से कोई संबंध नहीं है यह विशुद्ध विज्ञान है। इसमें धरती गोल है यह बताई गई है ना कि चपटी मंगल बुध गुरु का रंग और चांद सूरज ग्रहों की दूरी का वर्णन है। अंग्रेजी में प्राणवायु को नाम देने का श्रेय पाश्चात्य वैज्ञानिक जोसेफ प्रिस्टले को दिया गया है।

 

बेरियम ऑक्साइड को तब तक गर्म किया जाता है( लगभग 500 डिग्री सेल्सियस ) जब तक वह हवा से ऑक्सीजन प्राप्त करके पराक्साइड नहीं बना लेता है। अधिक तापक्रम( लगभग 800 डिग्री सेल्सियस) पर इस विघटन से ऑक्सीजन प्राप्त हो सकता है तथा इसे पुनः उपयोग से बेरियम ऑक्साइड बचा रहता है। ऑक्सीजन प्राप्त करने के विचार से कुछ अन्य ऑक्साइड भी जैसे तांबा पारा आदि तरह के ऑक्साइड इसी प्रकार से उपयोग किये जाते है। हवा से ऑक्सीजन को पूरी तरह से अलग करने के लिए अब द्रव हवा का अत्यधिक उपयोग किया जाता है जिसके विभाजन आसवन से ऑक्सीजन प्राप्त किया जाता है । पानी के विद्युत्श्लेषण से जल जनक के उत्पादन में ऑक्सीजन भी उप जात के रूप में मिलता है।

गुणधर्म:

ऑक्सीजन का घनत्व 1.4290 ग्राम प्रति लीटर तक लगभग होता है एवं यह गैस वायु की अपेक्षा 1.10527 गुना अधिक भारी भी होती है। इसका सबसे अधिक ताप 15 डिग्री सेल्सियस पर 0. 2178 कैलोरी प्रति ग्राम तक होता है। ऑक्सीजन के द्रवीकरण में विशेषज्ञों को विशेष कठिनाई हुई थी क्योंकि इसका क्रांतिक ताप -118.8 डिग्री सेल्सियस, दाब 49. 7 वायुमंडल तथा घनत्व जीरो 0. 430 ग्राम / सेंटीमीटर 3 है। इसका क्वथनांक – 183 डिग्री सेल्सियस तथा ठोस ऑक्सीजन का द्रवणांक माइनस 218. 4 डिग्री सेल्सियस है। 15 डिग्री सेल्सियस पर संकलन तथा वाष्पायन उष्माएं क्रमानुसार 3. 30 तथा 50.9 कैलोरी प्रति ग्राम है।

उपयोग:

ऑक्सीजन जीवित प्राणियों के लिए बहुत आवश्यक होता है। ऑक्सीजन मनुष्य में भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक साबित होती है। इसे मनुष्य स्वसन द्वारा ग्रहण करते हैं। द्रव ऑक्सीजन पेट्रोलियम और ,कार्बन इत्यादि का मिश्रण अति विस्फोटक होता है। ऑक्सीजन सिरका, और वार्निश इत्यादि को बनाने तथा असाध्य रोगियों के सांस लेने के लिए भी इसका उपयोगी होता है। इसका उपयोग अधिकतर श्वसन व अनेक क्रिया विधियों में होता है जिसे कार्बन डाइऑक्साइड निरमुक्त होती है। कार्बनिक यौगिकों के दहन से इसके साथ जल भी निर्मित होता है।

पहचान:

दहकते हुए तिनके के प्रज्वलित होने से ऑक्सीजन की पहचान होती है( नाइट्रस ऑक्साइड से स्कोर भिन्नता नाइट्रिक ऑक्साइड के उपयोग से जानी जाती है) । ऑक्सीजन की मात्रा क्यूपप्रस क्लोराइड, क्षारीय पायरोगैलोल के घोल , तांबा अथवा इसी प्रकार की दूसरी उपयोग वस्तु द्वारा शोषित कराने से ज्ञात की जाती है। इसी प्रकार से ऑक्सीजन की पहचान की जाती है।

Conclusion

अब आपको यह पता चल गया होगा कि आप oxygen ki khoj Kisne Ki। ऑक्सीजन मानव जगत एवं जीव जंतुओं आदि सभी के लिए बहुत ही आवश्यक गैस है जिसकी सहायता से सभी इस धरती पर जीवित रहते हैं।

मैं आशा करत हूं कि आपको इस पोस्ट में ऑक्सीजन से संबंधित सभी तरह की जानकारी मिल गई होगी। यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे लाइक करें शेयर करें ताकि और भी लोगों को ऑक्सीजन की महत्वता के बारे में जानकारी मिलती रहे। यदि ऑक्सीजन से संबंधित कोई भी प्रश्न आपके मन में हो तो नीचे कमेंट बॉक्स के द्वारा आप हमसे पूछ सकते हैं हम आपके सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद…

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