Pen ka avishakar kisne kiya
Pen ka avishakar kisne kiya

Pen ka avishakar kisne kiya : आज हम अपने इस लेख में यह जानेंगे कि पेन क्या होता है एवं इसका आविष्कार कब और किसने किया था? कई सारे लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती है कि जिस पेन को हम रोजाना अपने इस्तेमाल में लाते हैं जिसके बिना किसी भी व्यक्ति का 1 दिन नहीं कटता उसका आविष्कार किसने किया है तो चलिए आज हम आपको अपने इस लेख में यह बताएंगे कि पेन का आविष्कार किसने किया?यह जानने के लिए हमारे इस लेख को पूरा पढ़ें–

पेन हमारे जीवन में क्या महत्व रखता है आज मैं उसकी जानकारी देने जा रही हूं। पेन एक ऐसी चीज है जो हमें हर चीज लिखने में मदद करती है। पेन हमारे जीवन में एक रोशनी का काम करती है। अगर पेन ना हो तो हम कुछ लिख ही नहीं सकते हैं । पेन के आगे एक पतली सी नीव होती है जो कई धातुओं से बनी होती है। यह नीव कासा पीतल लोहा स्टील आदि से बनी होती है और उसके अंदर में बहुत ही बारीक छेद होता है। जिससे बहुत ही धीरे-धीरे स्याही निकल कर बाहर आती है। पेन के कारण ही हम किसी भी चीज को आसानी से लिख सकते हैं। अगर पेन नहीं होता तो आज कोई भी आदमी पढ़ लिख कर इतना बड़ा आदमी नहीं बन पाता।

पेन हमें अच्छी तरह लिखकर समझने या समझाने में बहुत मदद करता है अगर कोई महत्वपूर्ण जानकारी लिखनी हो तो पेंसिल से लिखा हुआ कुछ दिनों में मिट जाता है परंतु पेन से लिखा हुआ बहुत दिनों तक नहीं मिटता है या कहें हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है और कभी खराब नहीं होता। आज के समय में हम जिस पेन का इस्तेमाल करते हैं उसे बॉल पेन कहते हैं दूसरा पेन फाउंटेन होता है जिसमें रिफिल की जगह नीव से लिखते हैं।

पेन का आविष्कार किसने और कब किया? ( Pen ka avishakar kisne kiya ) 

वैसे तो स्याही से लिखी जाने वाली वस्तु आज से कई साल पहले निकल चुके थे परंतु उस वक्त की तरह उस चीज का डिजाइन तैयार नहीं किया गया था लेकिन कुछ ही साल बाद पेन आया था। स्पेन का डिजाइन आज से लगभग 24000 साल पहले डिजाइन किया गया था जिससे कि किसी भी तरह की चीज को लिखने एवं बनाने में मदद मिलती थी। 24000 साल पहले लोग अपनी फसलों एवं खेती शिकार किए गए जानवरों के चित्र को दीवारों पर पत्थर से बनाए गए औजार का उपयोग करते थे।

इन पत्थरों से वह दीवारों पर आसानी से जानवरों के चित्र बनाते थे। मिस्र के लोगों ने पेड़ पौधों का इस्तेमाल करके जब तक 4000ई. में कागज बनाया तब तक उस पर लिखने के लिए बांस के पौधे के बंबू से पेन बन चुका था। उसके बाद कई सालों के बाद मिस्र के लोगों ने बा स्वीट्स को पेन बनाने के रोजगार के रूप में आगे बढ़ाया। इसका उपयोग मोम की टेबल के ऊपर किसी रूम में लिखने के लिए किया जाता था।

लगभग 700 ईसवी पूर्व में कागज पर परिंदे के पैर का इस्तेमाल करके लिखा जाने लगा। इस तरीके से लिखना काफी कठिन होता था इसी वजह से कई सारे लोग पेन बनाने के अलग अलग तरीके के काम में जुट गए परंतु लोगों द्वारा अलग-अलग तरीके से बनाए गए प्रेम में कुछ ना कुछ खामियां रह जाती थी।

उसके बाद वर्ष 1827 ईस्वी में पेट्राचे पोएनरू द्वारा फाउंटेन पेन का आविष्कार किया गया। फिर भी इस फाउंटेन पेन में एक कमी रह गई थी। वह कमी यह थी कि जब इस पेन से लिखा जाता था तो इसकी स्याही को सूखने में थोड़ा वक्त लगता था। परंतु इस परेशानी को दूर करने के लिए जॉन जे लाउड ने वर्ष 1888 मैं बॉल पेन का आविष्कार किया। परंतु इस पेन में भी एक कमी रह गई और वह कमी यह थी कि यदि इस पेन की स्याही पतली होती तो वह लिक होने लगती एवं यदि मोटी होती तो इसके अंदर ही अटक जाती थी।

इन दोनों आविष्कारों के असफल होने के बाद हंगेरी के रहने वाले लैस्जलो बिरो अपने भाई जॉर्ज के साथ मिलकर लगभग 50 साल बाद फिर से बॉल पेन बनाना प्रारंभ किया। इन दोनों भाइयों को बॉल पेन को सही ढंग से बनाने का तरीका प्रिंटिंग मशीन में व्यवहार में आने वाली स्याही को देखकर आया क्योंकि प्रिंटिंग प्रेस में उपयोग में आने वाली सी आई बहुत जल्दी सूख जाती थी। Laszlo boro पहले एक जर्नलिस्ट हुआ करते थे परंतु उन्हें fountain pen को इस्तेमाल करने में परेशानी होती थी इसी वजह से उन्होंने 1938 में बॉल पेन का पैटर्न बना कर तैयार किया एवं दूसरे विश्वयुद्ध के शुरू होने से पहले ही लास्जलो बीरो अपने भाई के साथ अर्जेंटीना चले गए।

किसी भी पायलट को ऊंचाई पर फाउंटेन पेन से लिखने में मुश्किल हुआ करती थी परंतु जब बॉल पेन आया एवं पायलट ने बॉल पेन से लिखना शुरू किया तब यह और अधिक फेमस हो गई। उस समय में इस पेन की कीमत तकरीबन $13 हुआ करती थी जो आज के समय में $130 होती है। उसके बाद धीरे-धीरे स्पेन की मांग और अधिक बढ़ने लगी एवं इसकी कीमत में गिरावट आ गई। वर्ष 1953 में माइकल बीच नामक एक निर्माता bic pens के साथ मार्केट में आए। अमेरिकन बाजार में उन्होंने 1950 के दशक में नए-नए डिजाइन के बॉल पेन लगाए एवं 1960 के दशक में वे बिग पेंस को बेचने में सफल हो गए। जब वे अपने इस काम में सफल हो गए तब उन्होंने अपने अभियान के नारे गले में द फर्स्ट टाइम हर टाइम को प्रकाशित कर दिया। 1940 से 1960 का दशक के युग का समय मैं सभी तरह के पेन के आविष्कार के लिए प्रतिस्पर्धी युग माना जाता था।

वर्ष 1962 में मार्कर कलम का आविष्कार हुआ था। इस मार्कर पेन का आविष्कार टोक्यो के स्टेशनरी कंपनी जिसे हम पटेल के नाम से जानते हैं उसका निर्माण जापानी युकियो होरी ने किया था। आज के समय में मार्कर पेन काफी ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं। उसके बाद 1963 ईस्वी में एक जापानी कंपनी एवं ऑटो द्वारा वर्ष 1963 में रोलर बॉल पेन आम आदमी के लिए बनाया गया था। उसके बाद पेन के ऊपर वर्ष 1990 में कंपनी द्वारा रबर का एक कवर लगाया गया जिससे की जब कोई व्यक्ति पेन का इस्तेमाल करें तो उसे लिखने में असुविधा ना हो इस बात को ध्यान में रखकर पेन के ऊपर कंपनी द्वारा रबर का एक कवर तैयार किया गया।

Pen ka avishakar kisne kiya
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Conclusion

मुझे उम्मीद है कि अब आपको यह पता चल गया होगा कि हम जिस पेन का इस्तेमाल रोजाना के कार्य में करते हैं Pen ka avishakar kisne kiya कैसे हुआ है एवं किसने किया है एवं किन किन बदलावों के साथ इस पेन का आविष्कार किया गया था। आपको यह सब जानकारी मिल चुकी होगी।

मैं आशा करती हूं कि आज का हमारा यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा तो इसे लाइक करें शेयर करें जिससे कि आपके दोस्त एवं और भी कई सारे लोगों को यह जानने का अवसर मिले की पेन का आविष्कार किसने किया? यदि इस पोस्ट से संबंधित आपके मन में किसी भी तरह के सवाल हो तो नीचे कमेंट बॉक्स पर अवश्य लिखें हम आपके सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद……

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